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नर्मदा परिक्रमा

नर्मदा नदी गंगा नदी से भी अधिक प्राचीन है. नर्मदा एकमात्र नदी है जिनकी परिक्रमा की जाती है. नर्मदा परिक्रमा किसी भी तीर्थ यात्रा कि तुलना में सर्वाधिक कठिन चुनौतीपूर्ण एवं पवित्र कार्य माना जाता है. तीर्थयात्री भरूच से पदयात्रा प्रारंभ करते हैं एवं नदी के साथ चलते हुए मध्यप्रदेश में अमरकंटक स्थित उद्गम स्थल तक जाते हैं एवं दूसरी दिशा से वापस भरूच तक जाते हैं. यह कुल २६०० किलोमीटर लंबी यात्रा है. इस मार्ग में पड़ने वाला एकमात्र ज्योतिर्लिंग श्री ओंकारेश्वर है. 
प्रस्तुत दृश्य मोरटक्का स्थित खेड़ीघाट में सूर्योदय...

 
 

 
सोमवार सवारी
पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में प्रति सोमवार भगवान् ओंकारेश्वर की सवारी मंदिर प्रांगण से सायं ५ बजे प्रारंभ होकर शंकराचार्य मंदिर से होते हुए कोटितीर्थ घाट पहुँचती है। घाट पर भोलेनाथ का पूजन, अभिषेक एवं आरती पश्चात भगवान् भोलेनाथ की सवारी नौका विहार करते हुए ओमकार मठ घाट से होते हुए मुख्य मार्ग पहुँचती है, ततपश्चात नगर दर्शन देते और भ्रमण करते हुए मंदिर पहुँचती है। मंदिर में आरती द्वारा सवारी का समापन होकर प्रसाद वितरण किया जाता है। सवारी के साथ आकर्षक वेशभूषा में नंदीगण, भजन समूह व भक्तगण आनंद लेते हुए साथ में भ्रमण करते है।