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  दादा जी धाम
श्री दादा दरबार खंडवा ,श्री १००८ श्री बड़े दादाजी महाराज एवं श्री १००८ श्री छोटे दादाजी महाराज का मूल समाधी स्थल है .श्री १००८ श्री बड़े दादाजी महाराज ने यहाँ मार्गशीर्ष सुदी १३ दिनांक ३ दिसंबर १९३० को समाधी ली एवं श्री १००८ श्री छोटे दादाजी महाराज ने फाल्गुन सुदी पंचमी तदनुसार दिनांक ५ फ़रवरी १९४२ को समाधी ली . श्री दादा दरबार में दोनों समाधी स्थल पर भव्य मंदिर निर्मित हैं जो की सेवा पूजन समय को छोड़ कर २४ घंटे भक्तों के लिए खुला रहता है .दादा दरबार ओंकारेश्वर से लगभग ७० किमी दूरी पर खंडवा में स्थित है. यहाँ सड़क एवं रेल मार्ग से जाया जा सकता है.
  सिद्धवर कूट जैन तीर्थ
नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर प्रसिद्ध जैन तीर्थ सिद्धवर कूट स्थित है.यह नर्मदा एवं कावेरी के संगम पर स्थित है यह जैन धर्मं के महत्व पूर्ण स्थलों में से एक है एवं विभिन्न पौराणिक पात्रों की मोक्ष्स्थली माना जाता है. यहाँ १० जिनालय स्थित हैं जिनमे से कुछ ईस्वी १४८८ के बने हुए हैं. फाल्गुन मास की १३ वी से १५ वी तिथि यहाँ वार्षिक समारोह होता है . ओंकारेश्वर से बस मार्ग से अथवा नाव द्वारा जाया जा सकता है एवं ठहरने के लिये धर्मशालाएं उपलब्ध हैं.
  महेश्वर
शहर मध्य प्रदेश के खरगोन में स्थित है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर अपने बहुत ही सुंदर व भव्य घाट तथा माहेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं जैसे की कालेश्वर, राजराजेश्वर, विठ्ठलेश्वर और अहिलेश्वर जिनमे से राजराजेश्वर मंदिर प्रमुख है। आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ यहीं हुआ था।इस शहर को महिष्मती नाम से भी जाना जाता था। महेश्वर का रामायण और महाभारत में भी उल्लेख है। देवी अहिल्याबाई होलकर के कालखंड में बनाए गए यहाँ के घाट सुंदर हैं और इनका प्रतिबिंब नदी में और खूबसूरत दिखाई देता है।यहाँ राजगद्दी और रजवाड़ा भी स्थित है महेश्वर ओंकारेश्वर से ७० किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ सड़क मार्ग से जाया जाता है।

  बुरहानपुर
यह नगर मध्‍यप्रदेश में ताप्‍ती नदी के कि‍नारे स्थित है. यह ओंकारेश्वर से लगभग १२० किमी की दुरी पर स्थित है. कई विशाल द्वारों से सुसज्जित परकोटों से यह नगर घिरा हुआ है. बुरहानपुर मुगलों के काल में कुछ समय तक राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित था. यह नगर मध्‍यकालीन इतिहास के महत्‍वपूर्ण मकबरों, मस्जिदों और ऐतिहासिक वस्‍तुओं से परिपूर्ण है. नगर के ह्रदयस्‍थल पर जामामस्जिद स्थित है. जिलामुख्‍यालय से 15 किमी दूरी पर स्थित असीरगढ़ किले को दक्‍खन का दरवाजा नाम से जाना जाता था. इसकी भव्‍यता आज भी दर्शनीय है. इसके अतिरिक्त बोहरा समाज की विश्व प्रसिद्ध “दरगाह ए हकीमी” यहाँ पर स्थित है. खुनी भंडारा आहुखाना, शाही हम्माम, इच्छा देवी मंदिर, गुरुद्वारा बड़ी संगत आदि पर्यटकों के लिए अन्य आकर्षण हैं.
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  उज्जैन
ओंकारेश्वर से १३० किमी दुरी पर स्थित एक प्रमुख शहर है जो क्षिप्रा नदी के किनारे बसा है। यह एक अत्यन्त प्राचीन शहर है। यह विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी थी। इसे कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हर १२ वर्ष पर सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है। भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल इस नगरी में स्थित है । उज्जैन मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इन्दौर से ५५ कि मी पर है. उज्जैन के प्राचिन नाम अवन्तिका, उज्जयनी आदि है। उज्जैन मन्दिरो की नगरी है। यहा कई तीर्थ स्थल है। यहाँ सड़क एवं रेल मार्ग द्वारा जाया जा सकता है.
  मांडू
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक पर्यटन स्थल है। यह इन्दौर से लगभग ९० किमी दूर है एवं ओंकारेश्वर से १६० किमी दुरी पर है । माण्डू विन्ध्य की पहाडियों में 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह मूलत: मालवा के परमार राजाओं की राजधानी रहा था। तेरहवीं शती में मालवा के सुलतानों ने इसका नाम शादियाबाद यानि "खुशियों का शहर" रख दिया था। वास्तव में यह नाम इस जगह को सार्थक करता है। यहाँ के दर्शनीय स्थलों में जहाज महल, हिन्डोला महल, शाही हमाम और आकर्षक नक्काशीदार गुम्बद वास्तुकला के उत्कृष्टतम रूप हैं। परमार शासकों द्वारा बनाए गए इस नगर में जहाज और हिंडोला महल खास हैं। यहाँ के महलों की स्थापत्य कला देखने लायक है। सड़क मार्ग से यह धार से भी जुड़ा हुआ है।